पौड़ी जिले में पोक्सो मामलों में सपोर्ट पर्सन की भूमिका निभा रहे और सामाजिक कार्यकर्ता मनीष भट्ट ने बताया कि कुछ दिन पूर्व एक असहाय और निर्धन बुजुर्ग महिला का उन्हें कहीं से फोन आया और कहा कि बेटा मैं बहुत परेशान हूं मेरी दोनों आंखों में समस्या आई है अब दिखाई देना बंद सा हो गया है मैं कुछ काम भी नहीं कर पाती हूं। और अपनी सारी परिस्थितियों से अवगत कराकर मदद की गुहार लगाई। साथ ही कहा कि पहले वे अपनी आंखों के इलाज के लिए हंस फाउंडेशन सतपुली और सीतापुर आई हॉस्पिटल कोटद्वार में दिखा चुकी हूं लेकिन उन्होंने ज्यादा खराब स्थिति के चलते इलाज से इनकार कर दिया । अब पुनः कहीं से इलाज करवा दो जिससे कि मै आगे अपना जीवन यापन कर सकूं। इस संबंध में वे कई जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगा चुकी थी लेकिन कही से कोई सपोर्ट नहीं मिला। तो सामाजिक कार्यकर्ता मनीष भट्ट ने कहा कि वे बाहर किसी बड़े हॉस्पिटल में भी इलाज नहीं करवा सकती थी । और न किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज करवाने में सक्षम थी। और फिर इसके लिए एक सहयोगी तो उनके साथ होना भी जरूरी था। तो इस संबंध में मनीष भट्ट द्वारा कोटद्वार स्थित एक प्राइवेट क्लीनिक डॉ सूफियान आई हॉस्पिटल के डॉ सूफियान से संपर्क कर मदद के लिए आगे आने को कहा और उस बुजुर्ग माता जी की सारी परिस्थितियों से अवगत कराया। तो डॉ सूफियान एकदम से निशुल्क इलाज के लिए तैयार हो गए। और हाथोंहाथ माता जी का सफल ऑपरेशन कर दिया। और साथ में निःशुल्क दवाएं भी दे दी। और पुनः आगे के चेकअप के लिए भी निश्चित कर दिया। इस तरह सहयोग और राहत प्रदान करने के लिए मनीष भट्ट ने और माता जी ( भागीरथी देवी उम्र 66 वर्ष, सिम्भलचौड़ निवासी) ने भी डॉ सूफियान का हार्दिक आभार प्रकट किया।
*दूसरा एक उल्लेखनीय पहलू – कहते हैं कि अगर आप किसी की निस्वार्थ भावना से सेवा करते हैं तो आपको भी आगे कहीं न कहीं से सहयोग प्राप्त हो जाता है*। माता जी सिम्भलचौड़ में अपने पुराने और जर्जर मकान में रहती है और एक बेटा होने के बावजूद कोई सहारा नहीं है लेकिन जब सामाजिक कार्यकर्ता मनीष भट्ट माता जी की हालत देखने उनके घर में गए तो उस वक्त बारिश हो रही थी और उनके घर के सभी दरवाजे टूटे हुए थे और अंदर अंदर लावारिस गौवंश और आवरा कुत्ते बारिश से बचने के लिए शरण लिए हुए थे और साथ में वहां पर माता जी ने उनके लिए घर के आंगन में ही चारा कुट्टी भी परोसी हुई थी। मनीष भट्ट ने कहा कि मैं भौचक्का रह गया कि जिन बुजुर्ग महिला की खुद की आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य इतना खराब हालात हैं उनके घर के अंदर आवारा पशु शरण लिए हुए हैं और अपने हिसाब से जानवरों ने भवन की दीवारों और दरवाजों को भी क्षतिग्रस्त किया हुआ था जिसका कि माता जी को कोई मलाल भी नहीं था। तो माता जी से पूछने पर पता चला वे कहने लगी कि कहां जाएंगे ये बेचारे लोग इनका दूध पीकर बाद में इन्हें असहाय छोड़ देते है और वे यहां आ जाते है तो मुझे उनके लिए पहले खाना रखना पड़ता है । और जब मनीष भट्ट उन्हें डॉ के पास ले जाने लगे तो कुछ वही आवारा कुत्ते उन्हें बाहर सड़क तक छोड़ने ऐसे आए जैसे अपने किसी परिवार के बीमार सदस्य को छोड़ते समय इंसान मायूस होते है । उधर उनके टूटे हुए दरवाजों के सामने चौकीदारी की जिम्मेदारी भी माता जी ने उन बेजुबान कुत्तों को देते हुए जल्दी आने का भरोसा दिला कर चल दी। लगभग 5 घंटे बाद जब माता जी ऑपरेशन करवा कर लौटी तो कुत्ते वही दरवाजे के पास इंतजार कर रहे थे और देखते ही उछलने लगे। कहते हैं कि यदि आप किसी को सहयोग देते है तो आपको वापस जरूर सहयोग मिलता है। अब डॉ साहब के निशुल्क इलाज से माता जी फिलहाल अपने घर में पहुंच कर प्रसन्न थी और आवारा कुत्ते भी …. अब इस स्थिति में माता जी न जाने कैसे अपने लिए भोजन बनाएंगी पता नहीं ….
एक बार पुनः डॉ सूफियान जैसे महान डॉक्टरों और व्यक्तित्वों के प्रति हम आभार प्रकट करते है ….बहुत बहुत धन्यवाद डॉ सूफियान….
