कोटद्वार अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनोज कुमार द्विवेदी की अदालत ने वर्ष 2015 के लॉटरी ठगी मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। सहायक अभियोजन अधिकारी विक्रांत राठौर ने बताया कि अदालत ने आरोपी को धोखाधड़ी का दोषी माना है जबकि आपराधिक न्यास भंग (धारा 406) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अपराध के आरोपों से बरी कर दिया। जुर्माना अदा नहीं करने पर अभियुक्त को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सहायक अभियोजन अधिकारी के अनुसार यह मामला 6 जुलाई, 2015 का है। इस मामले में अदालत ने पीड़ितों, बैंक अधिकारी और विवेचना अधिकारी समेत सात गवाहों के बयान और बैंक अभिलेखों को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। अभियोजन के अनुसार, जुलाई 2015 में कोटद्वार निवासी महिला किरन देवी को फोन कर 25 लाख रुपये की लॉटरी निकलने का झांसा दिया गया। सिक्योरिटी मनी जमा कराने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 8.50 लाख रुपये जमा करा लिए गए। साइबर क्राइम पुलिस की जांच में सामने आया कि इनमें से 30 हजार रुपये आरोपी कृष्ण कुमार सिंह उर्फ कृष्णा राय के खाते में जमा हुए थे जिन्हें बाद में निकाल लिया गया। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर कोटद्वार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में अभियोजन की ओर से कुल सात गवाह पेश किए गए। न्यायालय ने माना कि आरोपी धोखाधड़ी की साजिश का हिस्सा था और उसके खाते में आई रकम तुरंत निकाल ली गई थी। आपराधिक न्यास भंग (धारा 406) और आईटी एक्ट की धारा 66 के आरोपों के समर्थन में साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपी को उन धाराओं से दोषमुक्त कर दिया गया।
साइबर ठगी के मामले में चार साल की सजा, कोटद्वार ACJM कोर्ट ने सुनाई सजा
